A collection of famous poems of eminent poets of present time and past.
इक अधूरी प्रेम कहानी
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किया कुर्बान अपनी सारी ख़ुशी जिनके लिए
ख़ुदग़र्ज़ मुझे ही भूल गए गैरों की ख़ुशी के लिए
जागते थे जिनके लिए कभी सारी रात छुप छुपाकर
ख़ुदग़र्ज़ मुंहमोड़ रहें हैं आज दूजे को ढाल बनाकर
गिरना भी अच्छा है, औकात का पता चलता है। बढ़ते हैं जब हाथ उठाने को, अपनों का पता चलता है। जिन्हें गुस्सा आता है, वो लोग सच्चे होते हैं। मैंने झूठों को अक्सर मुस्कुराते हुए देखा है। सीख रहा हूं अब मैं भी इंसानों को पढ़ने का हुनर सुना है चेहरे पे किताबों से ज्यादा लिखा होता है।
कथानक व्याकरण समझें तो सुरभित छंद हो जाए हमारे देश में फिर से सुखद मकरंद हो जाए मेरे ईश्वर मेरे दाता ये कविता माँगती तुझसे युवा पीढ़ी सँभल कर के विवेकानंद हो जाए बिना मौसम हृदय कोकिल से भी कूजा नहीं जाता जहाँ अनुराग पलता हो वहाँ दूजा नहीं जाता विभीषण रामजी के भक्त हैं ये जानते सब हैं मगर जो देशद्रोही हों उन्हें पूजा नहीं जाता जिसे सींचा लहु से है वो यू हीं खो नहीं सकते सियासत चाह कर विषबीज हरगिज बो नहीं सकती वतन के नाम जीना और वतन के नाम मर जाना शहादत से बड़ी कोई इबादत हो नहीं सकती ~ कविता तिवारी
क ल सारी रात मैं यूं ही करवटें बदलता रहा आंखें बंद थी मेरी पर, मैं रात भर जगता रहा थे याद आ रहें मुझे दादाजी की कहानियां पर मैं बिछाने पर यूं ही अचेत सा पड़ा रहा सब सो रहें थे चैन से पर,यूं ही जगता रहा कमरे की खिड़कियों से मैं चांद को निहारता रहा खल रही थी कमी मुझे दादीजी के आंचल की जिसकी छाव में, था मैंने अपना बचपन बिताया अचानक से पड़ी आंखों पर सूरज की तेज़ किरण उठकर बैठ गया मैं अपनी आंखें मलता हुआ सहसा मेरे कानों में एक आवाज़ महसूस हुई मानो कोई कह रहा हो,शुरू हो गई है जवानी "अब ना रहा वो बचपन सुनहरा" Like, Comment,Share and Follow.
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